प्रथम पृष्ठ पर जिसके तुमने प्रेम प्राक्कथन लिख डाला।
कोरे मन पर कलम से दिल की तुमने मनहर प्रीत लिखी।
मौन अधर थे जाने कैसे प्रीत मेरे मनमीत लिखी।
दीप्त किया मन मेरा तुमने जीवन चन्दन कर डाला।
जीवन के इस ग्रन्थ को मेरे तुमने अनुपम कर डाला।
छुआ हृदय था जिस दिन तुमने गूँज उठी शहनाई थी।
साँसों की सरगम पर धड़कन की वीणा भी गायी थी।
बन राधा तुमने मन मेरा वृन्दावन ही कर डाला।
जीवन के इस ग्रन्थ को मेरे तुमने अनुपम कर डाला।
मधुर किया जो जीवन तुमने उसमें रुनझुन तेरी है।
मन के दीपक में जीवन की जो बाती वह मेरी है।
हृदय मेरा है पूजा तुमने तन मन अर्पण कर डाला।
जीवन के इस ग्रन्थ को मेरे तुमने अनुपम कर डाला।
सोंचा पहला गीत ग्रन्थ का मन से तुम्हें सुना दूँ मैं।
तले पाँव के आज तुम्हारे अपना हृदय बिछा दूँ मैं।
मेरे जीवन के कण कण का तुमने वन्दन कर डाला।
जीवन के इस ग्रन्थ को मेरे तुमने अनुपम कर डाला।
मेरी साँसों पर मेरा अब तनिक रहा अधिकार नहीं।
मैंने तुमसे तुमने मुझसे प्यार किया व्यापार नहीं।
मधुर मेरे जीवन को तुमने नन्दन कानन कर डाला।
जीवन के इस ग्रन्थ को मेरे तुमने अनुपम कर डाला।
